कपड़े पहनने की स्वतंत्रता और हर्ष की हत्या शिवमोग्गा


सभी महिलाओं को पुरुषों को लिस्बियंस गे ट्रांसजेंडर्स बाय सेक्सुअल आदि विभिन्न समुदायों को समाज की सुरक्षा को खतरे में डाले बगैर वस्त्रों को पहनने की स्वतंत्रता हर हाल में मिलनी चाहिए ही चाहिए।
हिजाब जो कि मात्र सिर और गर्दन ढकने का एक वस्त्र है उसकी तुलना मुंह और पूरे अंदरूनी लिबास को ढक लेने वाले घटिया छुप-छुपाओ भरे अनैतिक और क्रूर स्त्री दमनकारी बुर्के से कभी नहीं करी जानी चाहिए।
हिजाब पर चल रही चर्चा को बुर्के की फोटो के साथ कभी भी नहीं दिखाना चाहिए।
सभी पूर्व एशियाई कुरानी बाहुल्य देशों द्वारा सिर और गर्दन ढकने वाले वस्त्र को प्रोत्साहित किया जाता है किंतु इंडियन मीडिया दिखाती तो अफगानी चादरी को है किंतु चर्चा या सूचना सिर ढकने वाले कपड़े हिजाब की करती है। यह छलावे भरा चित्रण, दीनी औरतों की जिंदगी को अंधकार की ओर फेंकने जैसा, क्रूर स्त्रीदमन का सुनियोजित षड्यंत्र है, जिसके पीछे छिपे बैठे गीदड़ों को दण्डित करना चाहिए । अति खतरनाक, आतंकीप्रिय लिबास को आजादी के नाम पर बिल्कुल भी प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए।
भयजनक छुपाव वाले लिबास को भी व्यक्तिगत अथवा चिकित्सकीय आवश्यकता हेतु इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता शर्तो के तहत सिक्योरिटी नम्बर के साथ दी जानी चाहिए। बिना पहचान संख्या  के पूर्णतः छुपाव वाले लिबासों के पहनने और रखने पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए। बिना पहचान के साईकिल, रेहड़ी, ठेला गाड़ी, निजी व सार्वजनिक रिक्शा आदि वाहन को संचालन की अनुमति नम्बर प्लेट के साथ मिलती है। उसी तरह से छुपाव वाले परिधानों के साथ होना चाहिए। ताकि कोई दुर्घटना पहचान छुपने के कारण अंजाम तक पहुंचाने वाले लोगों को दण्डित किया जा सके।
भयजनक चादरी के नीचे जिसमें से मात्र एक आंख ही दिखाई दे ऐसे छुपाओ भरे लिबास को मानव अधिकारों का दमन और तस्कर प्रिय पहरावा मानना चाहिए। लिबासों के भीतर छुपे हुए व्यक्ति को पहचान स्वरूप वाहनों के समान ही पहचान संख्याओं को आवंटित किया जाना चाहिए, ताकि उक्त व्यक्ति की पहचान अंकों के माध्यम से सार्वजनिक रहे। जिससे लिबासों के भीतर होने वाली अपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित करके सामान्य जन की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। इस प्रकार सामाजिक सुरक्षा और लिबास की आजादी दोनों को ही हासिल किया जा सकता है और सौहार्द रक्षा भी हो सकती है।

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