प्रेमरस के उद्गार


भारत माता को याद करें

भारतमाता नाम की पेंटिंग की रचना 1905 में भारत के प्रसिद्ध चित्रकार अवनींद्रनाथ ठाकुर ने की थी।
  • 'भारत माता की जय' के नारे पर लगातार विवादास्पद बयान आ रहे हैं। जानते हैं कभी आजादी की लड़ाई में जोश भर देने वाला यह जयघोष आया कहां से था। पहली बार कब हुआ इस्तेमाल... 1. पहली बार 1873 में आया था नाटक
बंगाल के लेखक किरणचंद्र बंदोपाध्याय के नाटक 'भारत माता' के साथ सबसे पहले यह दो शब्द सामने आए। नाटक सन् 1873 में खेला गया था। यह बंगाल में अकाल की कहानी थी। घर छोड़कर जा रही महिला और उसके पति को एक पुजारी भारत माता के मंदिर ले जाता है। पति-पत्नी अंग्रेजों को हराने की लड़ाई में क्रांतिकारियों के साथ हो जाते हैं। इसके बाद 1882 में बंकिमचंद्र चटोपाध्याय का उपन्यास ‘आनंदमठ’ आया । इसमें ‘वंदे मातरम’ कविता था। 2. अवनीन्द्रनाथ टैगोर ने बनाई थी पहली फोटो इसके बाद वर्ष 1905 में अवनीन्द्रनाथ टैगोर ने भारत माता का एक चित्र बनाया। इसे भारत माता की पहली तस्वीर माना जाता है। चित्र में भारत का नक्शा नहीं था। भारत माता भगवा रंग के बंगाल के परंपरागत परिधान में दिखाई गईं। शुरू में इसे बंग माता भी कहा गया। चार हाथों वाली देवी के हाथों में किताब, धान की पुली, माला और सफेद वस्त्र था।

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बोलो अमर बलिदानी हुतात्मा देवी झलकारी बाई की जय
 

रानी लक्ष्मी बाई की सेनापति

जन्म भयो कोरी के घर में

नाम हतो झलकारी बाई
ब्याह भयो पूरन के संग
छुप छुप के तलवार चलाई
अपनी क्षमता से यह सबला
सेना की सेनापति बन गई
फिर दूल्हा जू ने दगा दे दियो
खुले किबारे सन्मुख भीड़ गई
कद से, मुख से, एक सी लागे
झलकारी और लक्ष्मी बाई
भेष बदल रानी खुद बन गई
रानी पर जब विपदा आयी
फर्क कोउ पहचान सको न
कर्म से बन गई वह क्षत्राणी
दंग रह गई खुद रानी सा
बरसी जब झलकार कृपाणि
बचा लियो झांसी लक्ष्मी को
भेज दियो गढ़िया के पार
लड़ते-लड़ते प्राण त्याग दये
पर पहले मारे शत्रु हजार
धन्य धन्य है ग्राम "भोजला"
जिसमें जन्मी यह वीराणी
नतमस्तक बुंदेलखंड है
नतमस्तक भारत के प्राणी
सौजन्य से - भूपेंद्र सिंह परिहार


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