आपने
प्राचीन समय में कुछ लोगो को देखा होगा जो कुछ भी सोचते ही प्राप्त कर
लेते थे।आज में आपको उस अध्यात्म और विराट शक्ति का प्रयोग करना सिखाऊंगा
जिससे आप 17 सेकंड में कुछ भी प्राप्त कर सकते है
आपके
मन में कभी सवाल आया है कि क्या हम भी उस शक्ति को प्रयोग में ले सकते है
जिनसे चमत्कार जैसी घटना और ईश्वर की उस विराट शक्ति से अपने सपने सच कर
सकते है?
आज में आपको उस शक्ति के स्त्रोत और उसके प्रयोग के बारे में बताता हूं। वह शक्ति आपके अवचेतन मन की है।
कभी कभी आपको ऐसा हुआ की आपने किसी को याद किया हो और उस व्यक्ति का कॉल आ गया हो उसी समय या वो व्यक्ति उसी समय मिल गया हो?
कभी कभी आप कोई बात सोच रहे होते है और उसी समय उससे सम्बंधित घटना घट जाती हो।
कभी कभी लगता है कि ये घटना हमारे साथ पहले भी घटित हुई है(डेजा वु) ?
इन सब के पीछे कारण आपका अवचेतन मन है जो आपके साथ खेल रहा है।
आपके मस्तिष्क के 2 भाग है। चेतन और अवचेतन मन।
आप
वर्तमान में मात्र 5% दिमाग को काम ले सकते है और उसे ही चेतन मन कहते है।
लेकिन जो सोया हुआ मन है, जो 95% है वो अवचेतन मन है। इसी अवचेतन में
ब्रह्माण्ड की समस्त शक्तियां रखी हुई है। यदि आप इसके प्रयोग की विधि समझ
जाए तो विवेकानंद, दयानन्द सरस्वती, अल्बर्ट आइंस्टीन, निकोला टेस्ला, बॉब
प्रॉक्टर जैसे महान व्यक्ति जैसे बन जाएंगे जिन्होंने इस रहष्य को समझा है।
अवचेतन
में हमेशा कार्य करता रहता है, ये सो जाने के बाद भी कार्य करता रहता है।
इसमें फ्रीक्वेंसी का सिस्टम ऐसा है कि ये उस ईश्वर से जुड़कर हमारा कार्य
करने की क्षमता रखता है।
ये हमारे लिए हमेशा कार्य भी करता रहता है।
कभी
कभी आपने कोई डरावनी फिल्म तो देखि ही होगी। उस समय आपको डर भी लगता है।
जबकि आपको पता है कि उसमे से भूत नही आ सकता और न ही वो भूत जो टीवी में
देख रहे है वो हकीकत है। परन्तु फिर भी आप उस भूत वाली फिल्म से डर जाते
है। आपको पता है कि वो सिर्फ एक फिल्म ही तो है, पर फिर भी आप डर जाते है
और कभी कभी पसीना भी आने लगता है।
इसका कारण क्या है?
इसका
कारण यह है कि आपके चेतन मन को तो पता है कि सब झूठ है लेकिन आपके अवचेतन
मन को यह नही पता की क्या सच है और क्या झूठ है? वह हर चीज़ को सच ही मानता
है और वैसे ही आपके शरीर में बदलाव कर देता है और वैसे ही उस घटना को ऊनी
शक्ति से सच करने लगता है। इसीलिए तो आपको डर लगने लग जाता है। क्योंकि
अवचेतन मन ने आपको पागल बना दिया।
अवचेतन
मन की शक्तियों को लिखने लगु तो यहां जीवन भर लिखता ही रहूंगा। पर अब
प्रश्न ये आता है कि हम उस अवचेतन मन को हमारे पक्ष में कैसे उपयोग करे और
उससे 17 सेकंड में कैसे सपने को सच करे?
दरअसल
अवचेतन मन की एक खासियत है कि जब कोई विचार इस अवचेतन मन में डाल दिया जाए
तो यह उस विचार को हकीकत करके ही मानेगा। दुनिया में कोई ऐसी शक्ति नही जो
उस विचार को इस दुनिया में आने से रोक सके।
आप
जो वर्तमान में विचार सोचते हो तो वह आपके अवचेतन मन का कार्य है। आपका
चेतन मन फैसले लेता है लेकिन उन फेसलो को सत्य में बदलता है आपका अवचेतन
मन।
जैसे
की आपने किसी विचार को बोलने का सोचा, पर आपको ये सोचने की आवश्यकता नही
पड़ी की में अपनी जीभ को तीन बार ऊपर और दो बार नीचे ले जाकर ही इस इस शब्द
को बोल सकता हु। बल्कि आपने तो सोचा और आपके अवचेतन मन ने आपके गले के वोकल
कॉर्ड्स को सेट कर लिया, आपके जीभ पर नियंत्रण करके उसने आपकी जीभ को उसी
तरीके से घुमाया जिसमे वो आपके खास शब्द निकले।
दूसरा
उदाहरण देखे तो आप सो रहे है पर फिर भी सास चल रही है। यह जो सास ले रहा
है, जो आपके ह्रदय को गती दे रहा है, वह शक्तिशाली अवचेतन मन है।
ये अवचेतन मन सिर्फ आपके शरीर ही बल्कि इस ब्रह्माण्ड में भी वैसे ही कार्य कर रहा है।
जैसा
की मेने बताया कि कभी भी आप किसी के बारे सोचते हो और उस व्यक्ति का कॉल आ
जाता है। इसके पीछे भी उस अवचेतन की शक्ति का कार्य है। जब आप उस विचार को
सोच रहे थे तो उसी समय वो विचार अवचेतन मन चला गया, आपको पता भी नही चला
और अवचेतन मन ने तुरन्त उसको हकीकत में बदल दिया। इसीलिए हमारे पूर्वज कहते
थे की हमेशा अच्छा सोचो।
अब प्रश्न आता है कि फिर सारे विचार अवचेतन मन तक क्यों नहीं पहुंचते?
सारे
विचार इतने प्रबल और इच्छाशक्ति से नहीं बने होते कि वह चेतन मन तक पहुंच
सके। एक व्यक्ति का दिमाग 1 दिन में 70000 विचार सोचता है। इन 70000
विचारों में वह व्यक्ति अपने मन की शक्ति को बिखेर देता है। यदि वह व्यक्ति
नकारात्मक सोचता है तो उसका जीवन नकारात्मक ही होने लगता है और जो
सकारात्मक सोचता है वह सकारात्मक ही जीने लगता है। जब आप विचार सोचते हैं
और वह विचार प्रबल होता जाता है। जैसे-जैसे विचार प्रबल होता जाएगा
वैसे-वैसे विचार की शक्ति बढ़ती जाएगी। जैसे जैसे विचार की शक्ति बढ़ती
जाएगी वैसे-वैसे अवचेतन मन की तरफ जाता जाएगा। जिस दिन वह अवचेतन मन में
पहुंच गया उस दिन वह हकीकत में बदल जाएगा।
अब प्रश्न आता है कि फिर किसी विचार को अवचेतन मन में भेजने के लिए क्या करना चाहिए?
किसी
भी विचार को अवचेतन मन तक भेजने के लिए आपको लगभग 21 दिन का समय लगता है
परंतु कुछ लोगों को यह कुछ ही समय में अवचेतन मन में भेजा जा सकता है जैसे
कि आपने किसी को याद किया और उसका कॉल आया। उसी समय में विचार आपके अवचेतन
में चला गया था। इसके पीछे समय नहीं बल्कि आपकी वह इच्छाशक्ति थी उस
व्यक्ति को याद करने की। उससे मिलने की इच्छा शक्ति थी और वह काम आई और उस
विचार को इतना प्रबल बना दिया कि वह कुछ ही सेकंड में आपके अवचेतन मन तक
पहुंच गया और अवचेतन मन ने उसको हकीकत में बदल दिया। तो सबसे पहले आपको
अवचेतन मन में अपने विचार को भेजने के लिए उस विचार को प्रबल करना पड़ेगा।
प्रबल करने के लिए आप उस विचार को बार बार सोचना पड़ेगा। एक ही विचार को
पकड़कर बैठना पड़ेगा। अपने दिमाग में एक ही विचार को डालना पड़ेगा। जैसे कि
मान लीजिए आपको अमीर बनना है। तो आपके अंदर एक विचार प्रबल हो जाना चाहिए
कि "मैं अमीर हूं, मैं अमीर हूं, मैं अमीर हूं। यह विचार बार-बार अपने मन
में दौहराये। इसको पूरी भावनाओं के साथ दोहराना है ताकि अवचेतन मन को यह
जल्दी भेजा जा सके। क्योंकि आपके अवचेतन मन को सच और झूठ में कोई फर्क नहीं
पता लगता वह आप के द्वारा बोला गया झूठ भी सच मानता है और उसको सच में बदल
देता है। जैसे ही आप यह बोलेंगे कि मैं अमीर हूं, बार-बार यह मन में विचार
बनाने पर आपका चेतन मन है वह उस विचार को प्रबल कर देगा। विचार प्रबल होते
ही अवचेतन मन में चला जायेगा और जैसे ही अवचेतन मन में विचार चला जाएगा और
अवचेतन मन उस पर कार्य करना शुरू कर देगा। आपको अमीरी की दिशा में ले
जाएगा और आपको एक न एक दिन वह बहुत जल्द अमीर बना कर कर रख देगा। यह बात
मैं हवा में नहीं फेंक रहा हूं, मेरे पास इसके सारे प्रमाण है, विज्ञान में
इसके 5000 एक्सपेरिमेंट हो चुके हैं । इसको आकर्षण के सिद्धांत के नाम से
भी जाना जाता है और कारण और परिणाम के नियम से भी जाना जाता है। प्राचीन
समय में जो ऋषि मुनि होते थे वह अपनी सोच पर तपस्या करके काबू पा लेते थे
और जब सोच उनके नियंत्रण में आ जाती थी तो वह अपने विचार को प्रबल कभी भी
बना सकते थे जैसे ही विचार प्रबल होता था वह विचार हकीकत में बदल जाता था।
मैं कुछ महापुरुषों के नाम और उनके विचार यहां साझा करना चाहूंगा जिन्होंने
इस रहष्य को समझा था और अपने जीवन को महान बनाया था। यहां कुछ विचार दिए
गए हैं ..
जो कुछ भी आप सोचते हैं वह हकीकत है
- पिकासो
मनुष्य जैसा सोचता है वैसा ही वह बनता जाता है -ब्रूस ली
अवचेतन
मस्तिष्क का रहस्य काफी कम लोगों को पता है यदि अवचेतन मस्तिष्क में आप
अपने विचारों के बीच डाल दे तो आपको एक ना एक दिन वह फल अवश्य मिलता है
जिसकी आप कामना करते हैं।
- नाइटेंगल
जिस चीज को मनुष्य सोच सकता है तथा जिसकी कल्पना कर सकता है उस चीज को मनुष्य प्राप्त कर सकता है।-
नेपोलियन हिल
इस संसार में कुछ भी असंभव नहीं है आप जैसा सोचते हैं वैसा ही आप पा लेते हैं। आपके पास अनंत शक्तियां हैं।- स्वामी विवेकानंद
प्रकृति
के इस महान नियम को समझने पर ही व्यक्ति को सफलता मिलने में आसानी होती है
क्योंकि यह प्रकृति के उन नियमों में से है जो व्यक्ति को अपने वास्तविक
रूप के बारे में बताते हैं और उसके अवचेतन की जानकारी देते हैं- राल्फ विडो
इमर्शन
तर्क आपको ए से जेड तक लेजा सकता है, पर आपकी कल्पना आपको कही भी ले जा सकती है।- अल्बर्ट आइंस्टीन
कल्पनाएं आपके भविष्य का चित्रण है- अल्बर्ट आइंस्टीन
तो
दोस्तों यह कुछ महान लोगों के विचार थे जिससे यह ज्ञात होता है कि इस
शक्ति के बारे में उन्हें भी पता था। आप किसी भी महान इंसान का इंटरव्यू
अथवा उसकी बायोग्राफी उठा कर देखिए और उसके विचारों में पता कीजिए कि आपको
वो विचार अवश्य मिलेंगे कि उन्हें इस रहस्य का पता था। उन्हें आकर्षण के
सिद्धांत का पता था। उत्तर को काफी लंबा न रखते हुए मैं यही विराम देता हूं
तथा अगले जवाब में मैं आपको इसके प्रयोग की विधि और इसके वैज्ञानिक प्रयोग
का विश्लेषण करके पूर्ण बताऊंगा। पढ़ने के लिए धन्यवाद।
यदि जानकारी अच्छी लगी हो तो एक धन्यवाद दे सकते हो।
“एक
विचार लो, उस विचार को अपना जीवन बना लो – उसके बारे में सोचो उसके सपने
देखो, उस विचार को जियो, अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर
हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो,
यही सफल होने का तरीका है.”- स्वामी विवेकानंद।
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