वेदों की ओर लौटो - महर्षि दयानंद सरस्वती

भारत के युवा अभी भी वेदों से विज्ञान निकाल कर विश्व को चकित कर सकते हैं | भारत अंध विश्वासों से परे और ज्ञान विज्ञानं का विश्वकोश था | आप जो बता रहे हो ये सब उस महान भारत के कुछ भग्नावषेश मात्र हैं | महाभारत कालीन विज्ञानं को समझने के लिए अभी संसार के वैज्ञानिकों को 400 वर्ष लगेंगे | उसका उपयोग करने की क्षमता विकसित होना बहुतबड़ी बात है |
मांस आश्रित और जीवाश्म तेल आश्रित वाणिज्य व्यवस्था, अन्य जीवों के अधिकारों का हनन करने वाली अन्यायी वर्तमान मानव असभ्यता विज्ञानं को धारण नहीं कर सकती है | कंप्यूटर बना लेने से ही इसका भला हो जायेगा ऐसा सोचना बहुत विचित्र बात है प्राचीन भारतीय व्यवस्था मानव के उत्कर्ष और उन्नति पर आश्रित थी, जो सब प्रकार से व्यक्तिगत परिश्रम और योग्यता को प्रगति का कारण बनाती थी | हमारे दिमाग कंप्यूटर से अधिक तेज़ है लेकिन आज बिरले ही कोई उसका उपयोग करना जानता है | प्राचीन समय में मस्तिष्क को तेज बना कर कार्य सिद्ध करते थे | योग्य व्यक्ति के पास ही शक्ति रहती थी | किन्तु आज पाप बुद्धि भी धन लूट कर कंप्यूटर पॉवर के माध्यम से दुनिया में अव्यवस्था फैला रहे हैं | इस कारण ही विश्व दुःख और संकट झेल रहा है |

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