ऐसे क्या विलक्षण लोग थे जो मृत्यु भय से मुक्त थे और दूसरों के प्रति अपने सामान ही आत्म भाव रखते थे | गुरु अर्जनदेव जी हरगोविंद जी गुरु तेगबहादुर गुरु गोविंद अजितसिंह मीरा बाई ऋषि स्वामी दयानंद जी वीर सावरकर भाई राजीव दीक्षित जी चन्द्रशेखर आजाद जी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जी महारानी लक्ष्मीबाई जी देवी मैत्रेयी देवी गार्गी लोपामुद्रा मदालसा महर्षि याज्ञवल्क महर्षि दधीची वीर चारण बारहट छत्रपति संभाजी महाराज (वीर लक्ष्मणदास) बंदा बैरागी स्वामी श्रद्धानंद पंडित लेखराम बालवीर हकीकत राय लाला लाजपतराय खुदीराम बोस भारत की महान परंपरा जो शरीर को अनित्य और शरीरी को नित्य मानती है | भारतीय सभ्यता मानव शरीर को पुराने वस्त्रों मात्र से अधिक महत्त्व नहीं देती है किन्तु जीव हिंसा और अन्यों के प्रति हिंसा को भी प्रश्रय भी कभी नहीं देती है | क्या ऐसी संस्कृति और सभ्यता को जो किसी भी अन्य में भी स्वयं के विस्तार का दर्शन करती है, नश्वरता, जीवन मृत्यु चक्र और कर्म सिद्धांत विज्ञान को पूर्णता से जानती है, विश्व के पटल पर स्वतंत्र और शक्तिशाली नहीं होना चाहिए ?
Comments