सब स्वार्थ के वशीभूत हैं | लोग जब सुख सुविधाओं को ही सबकुछ मानने लगते हैं तो आचरण की शुद्धता हवा हो जाती है | रही बात बहु और सासों के बीच की लड़ाई की तो मुझे तो सोचकर भी डर लगता है की जब ये ऐसे अपने ही लोगों से झगडा करते हैं तो बहार के दीन दुखियों को क्या ही छोड़ेंगे | बच के रहो ||
सावधान अपने परिवारी जनो के साथ हिसा द्वेष और हर बात पर लड़ाई करने वाले कभी मत बनो | न्याय और अन्याय का विचार करके ही उपयुक्त कद्दम उठाना चाहिए |
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